दुनिया में मुश्किल से मिलते है धर्म पथ पर चलने की प्रेरणा देने वाले-हरीशमुनिजी म.सा
- by admin
- Oct 24, 2024
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मोक्ष की अभिलाषा है तो पाप का क्षय कर पुण्य का ग्राफ बढ़ाओ-सचिनमुनिजी म.सा.
अंबिका जैन भवन में मुकेशमुनिजी म.सा. के सानिध्य में चातुर्मासिक प्रवचन
जोधपुर संभाग पारस शर्मा अम्बाजी जो प्राणी इस नश्वर संसार में आया है उसकी एक न एक दिन मृत्यु तय है। प्रिय से प्रिय वस्तु का भी वियोग अवश्य होगा। हम मृत्यु से पूर्व अपना समय धर्म आराधना व सत्संग में लगाए तो आत्मा का कल्याण होकर हमे जन्म-जन्मांतर से मुक्ति मिल सकती है संवाददाता पारस शर्मा को बताया कि परमात्मा ओर धर्म के साथ ही हमारा रिश्ता शाश्वत होगा। मृत्यु आने से पूर्व धर्म से स्वयं को जोड़ने वाले का कल्याण होता है। ये विचार पूज्य दादा गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के शिष्य, मरूधरा भूषण, शासन गौरव, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री सुकन मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा. के सानिध्य में सेवारत्न श्री हरीशमुनिजी म.सा. ने बुधवार को श्री अरिहन्त जैन श्रावक संघ अम्बाजी के तत्वावधान में अंबिका जैन भवन आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शरीर के लिए धर्म का त्याग करने वाले बहुत मिल जाएंगे पर धर्म के लिए शरीर का त्याग करने वाले विरले ही होते है। हम सच व धर्म का साथ देना होगा ओर सत्य की राह पर चलने वालों का हौंसला बढ़ाना होगा। सत्य, अहिंसा के सिद्धांतों पर चलना भी धर्म की आराधना है। दुनिया में गलत रास्ते पर आगे बढ़ाने वाले तो कई मिल जाएंगे पर धर्म के पथ पर चलने की प्रेरणा देने वाले मुश्किल से मिलते है। प्रार्थनार्थी श्री सचिनमुनिजी म.सा. ने कहा कि इंसान जब सृष्टि में जन्म लेता है तो पुण्य ओर पाप भी साथ लेकर आता है। धर्म करेगा तो पुण्य बढ़ेगा ओर पाप करेगा तो पुण्य क्षीण होता जाएगा। पुण्यवानी से ही व्यक्ति को रिद्धी,सिद्धी, लक्ष्मी आदि की प्राप्ति होती है। हम जीवन में सुख ओर शांति चाहते है तो पुण्य बढ़े ऐसे कार्य करने होंगे। धर्म के पथ पर चलने से पुण्य बढ़ता जाएगा। उन्होंने कहा कि इंसान को जीवन में यदि मोक्ष की प्राप्ति करनी है तो हमे पाप क्षय करके पुण्य का ग्राफ बढ़ाते जाने होगा। इसके बिना जीवन सार्थक नहीं हो सकता। पुण्य का ग्राफ बढ़ाने के लिए धर्म की आराधना करने के साथ जिनवाणी श्रवण करनी होगी। धर्मसभा में युवारत्न श्री नानेशमुनिजी म.सा.,मधुर व्याख्यानी श्री हितेशमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में विभिन्न स्थानों से पधारे श्रावक भी मौजूद थे। धर्मसभा का संचालन गौतमचंद बाफना ने किया।
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