नल और बोरवेल सूखे…टैंकर माफिया फिर सक्रिय…पानी अब ‘सुविधा’ नहीं
- by admin
- Apr 22, 2025
सामर्थ्य’ की चीज बनता जा रहा है
गर्मी का पारा चढ़ते ही देश के कई हिस्सों में पानी की किल्लत ने एक बार फिर दस्तक दे दी हैं। जहां एक ओर सरकारी नल सूख चुके हैं, वहीं बोरवेल भी अब रेत उगलने लगे हैं। ऐसे में आम लोगों के लिए जीवन का सबसे जरूरी संसाधन पानी अब टैंकरों के जरिए ही मिल पा रहा हैं, वो भी दाम चुकाकर।
’टैंकर राज’ की वापसी
कई शहरों और कस्बों में सुबह-सुबह पानी के टैंकरों के आगे लाइनें लग जाती हैं। जैसे-जैसे जलस्रोत सूख रहे हैं, वैसे-वैसे टैंकर मालिकों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। कुछ जगहों पर एक टैंकर पानी के लिए 500 से 2,000 रुपए तक वसूले जा रहे हैं, वहीं कॉलोनियों में टैंकर के पानी को लेकर झगड़े तक हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात बदतर
गांवों में तो हाल और भी चिंताजनक है। कुएं और बावड़ियां पहले ही सूख चुकी हैं और बोरवेल का जलस्तर इतनी गहराई तक चला गया है कि अब नई खुदाई करवाना आम किसान के लिए मुमकिन नहीं। कई जगहों पर महिलाएं दो-तीन किलोमीटर दूर से पानी सिर पर ढोकर ला रही हैं।
प्रशासन की नींद गायब
चौंकाने वाली बात यह है कि जल संकट कोई अचानक आई आपदा नहीं है। हर साल गर्मी में यह समस्या आती है, लेकिन फिर भी प्रशासन के पास कोई दीर्घकालिक योजना नहीं है। अभी भी फायर ब्रिगेड और प्राइवेट टैंकरों से पानी पहुंचाने की ही जुगाड़ हो रही है।
क्या है समाधान ?
पानी की इस बढ़ती समस्या के बीच विशेषज्ञ फिर से वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting), पारंपरिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन और सामूहिक जल प्रबंधन पर जोर दे रहे हैं। लेकिन जब तक शासन और समाज इस दिशा में एकजुट होकर प्रयास नहीं करेंगे, तब तक हर गर्मी में ‘पानी के लिए कतार’ आम तस्वीर बनती रहेगी।
अंत में एक सवाल
जब देश चांद पर पहुंच रहा है, तो क्या हर नागरिक को पीने का पानी उपलब्ध करवाना आज भी इतना मुश्किल है ?
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