आतंकियों की धमकी … घाटी में होते रहेंगे ऐसे हमले
- by admin
- Apr 24, 2025
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद द रेजिस्टेंस प्रâंट सुर्खियों में है। इसी संगठन ने पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली है। टीआरएफ के नाम से मशहूर इस संगठन ने धमकी दी है कि घाटी में ऐसे हमले होते रहेंगे। २०१९ में गठित टीआरएफ टेरर किलिंग की कई वारदातों को पहले भी अंजाम दे चुका है।
बता दें कि २०१९ में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-३७० हटाया गया। इसके बाद आतंकी संगठनों में त्राहिमाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। सीमापार से आतंकी भारत आकर हमला नहीं कर पा रहे थे। इसलिए लश्कर-ए-तैयबा और इंडियन मुजाहिद्दीन ने मिलकर टीआरएफ का गठन किया। टीआरएफ को लेकर २०२१ में एक डिटेल रिपोर्ट पेश की इसके मुताबिक, इस संगठन की स्थापना में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने बड़ी भूमिका निभाई थी। आईएसआई के अधिकारियों ने ही इस संगठन का नाम सुझाया था। टीआरएफ पहला आतंकी संगठन है, जिसका नाम अंग्रेजी में रखा गया है। आमतौर पर आतंकी संगठनों के नाम में ऊर्दू या फारसी शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। कहा जाता है कि दुनिया की नजरों से बचने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने अंग्रेजी शब्द का इस्तेमाल किया था।
टीआरएफ कैसे करता है काम?
इस संगठन के सभी आतंकवादी जम्मू कश्मीर के ही रहने वाले हैं। संगठन से जुड़ते ही आतंकवादियों को पहले सीमापार ले जाकर ट्रेंड किया जाता है। इसके बाद उसे वापस जम्मू कश्मीर छोड़ दिया जाता है। टीआरएफ के आतंकवादी वारदात को अंजाम देने से पहले अपने घर पर ही रहते हैं। संदेश मिलने के बाद ये आतंकवादी गैंग में जाते हैं और फिर हमला करते हैं। हमले के बाद ये कहीं दूर-दराज इलाके में छिप जाते हैं। इस संगठन की स्थापना वैसे तो शेख सज्जाद गुल ने की थी, लेकिन इसका मुखिया कोई नहीं है।
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